Imran Pratapgarhi Shayari

Imran Pratapgarhi Shayari

Imran Pratapgarhi Shayari: इमरान प्रतापगढ़ी एक प्रसिद्ध शायर हैं, जिनकी शायरी भावनाओं और ताकतवर अल्फाज़ों के लिए जानी जाती है। उनके शब्द प्यार, दर्द और सच्चाई को दिल से बयां करते हैं और जिंदगी की हकीकत को खूबसूरती से दर्शाते हैं।

New Imran Pratapgarhi Shayari

Imran pratapgarhi shayari on politics

अब ना मैं हूँ ना बाकी हैं ज़माने मेरे
फिर भी मशहूर हैं शहरों में फ़साने मेरे,
जिन्दगी है तो नए ज़ख्म भी लग जाएंगे
अब भी बाकी हैं कई दोस्त पुराने मेरे।

इश्क़ में अक्सर ऐसा होता है…
जिसे हम पा नहीं सकते,
उसे दिल से निकाला भी नहीं जाता…!

वो बेवफ़ा है तो क्या हुआ,
हम तो अपने वादों पर आज
भी क़ायम हैं…

Imran Pratapgarhi Shayari love

मोहब्बत के सभी मंजर बड़े खाली से लगते हैं,
अख़ीदत से कहे अल्फाज़ भी झाली से लगती हैं,
वो रोहित बेमूला की मौत पर आंसू बहाता है,
मगर उस शाख के आंसू भी
घड़ियाल (मगर-मच) से लगते हैं…!

दिल की बात दिल में ही रह गई…
हमने सोचा कह देंगे,
मगर हिम्मत ही न पड़ी…!

वो कोई और थी…
जिसे मैं अपना समझ बैठा,
मैं जिसको चाहता था…
वो मेरे क़ाबिल ही कहाँ थी…!

Imran Pratapgarhi shayari in Parliament

चक दमन रफू करके लिखता हूँ मैं,
ज़ख्मा से गुफ्तगू करके लिखता हूँ,
दर्द गाने को भी हौसला चाहिए,
आंसुओं से वजू करके लिखता हूँ मैं..

मुफ़लिसी क्या-क्या करा देती है
इंसान से…
कभी वक़्त नहीं मिलता, कभी
अपनों से….

क़िस्मत की लकीरों पे मत जा ऐ दोस्त,
किस्मत तो उनकी भी होती है…
जिनके हाथ ही नहीं होते।

Imran Pratapgarhi Shayari lyrics

मेरे खुलूस की गहराई से नहीं मिलते
ये झूठे लोग हैं सच्चाई से नहीं मिलते
मोहब्बतों का सबक दे रहे हैं दुनिया
को जो ईद अपने सगे भाई से नहीं मिलते।

ग़मों की धूप में दिल जब भी पिघल
जाता है…
शेर बनता है तो दुनिया में निकल
जाता है…!

अपनी मोहब्बत का यो बस एक ही उसूल है,
तू कुबूल है और तेरा सबकुछ कुबूल है।

हाथों की लकीरें पढ कर रो
देता है…
दिल सब कुछ तो है मगर एक तेरा नाम क्यूँ
नहीं है…!

Imran Pratapgarhi Shayari On Politics

Imran Pratapgarhi Shayari lyrics

हमने उसके जिस्म को फूलों की वादी कह दिया,
इस जरा सी बात पर हमको फसादी कह दिया,
हमने अख़बर बनकर जोधा से मोहब्बत की,
मगर सिरफिरे लोगों ने हमको लव जिहादी कह दिया।

अब ना मैं हूँ ना बाकी हैं ज़माने मेरे,
फिर भी मशहूर हैं शहरों में फ़साने मेरे,
जिन्दगी है तो नए ज़ख्म भी लग जाएंगे,
अब भी बाकी हैं कई दोस्त पुराने मेरे ।

उसी जगह पर जहाँ कई रास्ते मिलेंगे,
पलट के आए तो सबसे पहले तुझे मिलेंगे।
अगर कभी तेरे नाम पर जंग हो गई तो,
हम ऐसे बुजदिल भी पहली सफ़ में खड़े मिलेंगे।

Imran Pratapgarhi Shayari

राह में ख़तरे भी हैं, लेकिन ठहरता कौन है,
मौत कल आती है, आज आ जाये डरता कौन है,
तेरी लश्कर के मुक़ाबिल मैं अकेला हूँ मगर,
फ़ैसला मैदान में होगा कि मरता कौन है।

हाथों की लकीरें पढ कर रो देता है,
दिल सब कुछ तो है,
मगर एक तेरा नाम क्यूँ नहीं है।

मेरे खुलूस की गहराई से नहीं मिलते,
ये झूठे लोग हैं सच्चाई से नहीं मिलते,
मोहब्बतों का सबक दे रहे हैं दुनिया
को जो ईद अपने सगे भाई से नहीं मिलते.!

इमरान प्रतापगढ़ी शायरी हिंदी में

Imran Pratapgarhi Shayari 2 line

अपनी सांसो में आबाद रखना मुझे,
में रहू ना रहू याद रखना मुझे।

अपनी मोहब्बत का यो बस एक ही उसूल है,
तू कुबूल है और तेरा सबकुछ कुबूल है।

मोहब्बत के सभी मंजर बड़े खाली से लगते हैं,
अख़ीदत से कहे अल्फाज़ भी झाली से लगती हैं,
वो रोहित बेमूला की मौत पर आंसू बहाता है,
मगर उस शाख के आंसू भी
घड़ियाल (मगर मच) से लगते हैं।

Imran pratapgarhi shayari on

हमने सीखा है ये रसूलों से,
जंग लड़ना सदा उसूलों से,
नफरतों वाली गालियाँ तुम दो,
हम तो देंगे ज़वाब फूलों से।

ज़माने पर भरोसा करने वालों,
भरोसे का ज़माना जा रहा है,
तेरे चेहरे में ऐसा क्या है आख़िर,
जिसे बरसों से देखा जा रहा है।

इस तरह हौसले आज़माया करो,
मुश्किलें देखकर मुस्कुराया करो,
दो निवाले भले कम ही खाया करो,
अपने बच्चों को लेकिन पढ़ाया करो..!

Alfaaz Shayari >>


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